Sheetala Saptami 2026

Sheetala Saptami 2026: 10 मार्च को शीतला सप्तमी, बच्चों को बीमारियों से बचाने के लिए करें ये काम, इन गलतियों से नाराज़ होती हैं माता शीतला

Sheetala Saptami 2026 हिंदू धर्म में माता शीतला की पूजा का विशेष पर्व माना जाता है। यह व्रत मुख्य रूप से बच्चों की अच्छी सेहत, रोगों से रक्षा और परिवार की सुख-समृद्धि के लिए रखा जाता है। साल 2026 में शीतला सप्तमी 10 मार्च, मंगलवार को मनाई जाएगी। इस दिन माता शीतला की पूजा करने और कुछ खास नियमों का पालन करने की परंपरा है, जिसे कई जगह “बसोड़ा” भी कहा जाता है।

Sheetala Saptami 2026 पर माता शीतला की पूजा का शुभ मुहूर्त 10 मार्च 2026 को सुबह 06:37 बजे से शाम 06:26 बजे तक रहेगा। इस तरह पूजा के लिए कुल अवधि लगभग 11 घंटे 50 मिनट मानी गई है। हालांकि धार्मिक परंपराओं के अनुसार शीतला माता की पूजा सुबह के समय करना सबसे शुभ माना जाता है, इसलिए अधिकतर श्रद्धालु सुबह 6:30 बजे से 9 बजे के बीच माता शीतला की विधि-विधान से पूजा करते हैं और परिवार व बच्चों की अच्छी सेहत के लिए प्रार्थना करते हैं।

एक दिन पहले बनता है सारा भोजन

Sheetala Saptami की सबसे खास परंपरा यह है कि 9 मार्च को ही पूरा भोजन बनाकर रख लिया जाता है। मान्यता है कि सप्तमी के दिन घर में चूल्हा नहीं जलाया जाता और एक दिन पहले बना हुआ ठंडा भोजन खाया जाता है।

इस दिन खास तौर पर ये व्यंजन बनाए जाते हैं:

  • दही-चावल
  • मालपुआ
  • पूरी और पराठा
  • बाफला / बाफना रोटी
  • अमचूर की सब्जी
  • पंचकूटा की सब्जी
  • दही वड़े

इन व्यंजनों को अगले दिन माता शीतला को भोग लगाने के बाद परिवार के सदस्य ग्रहण करते हैं।

शीतला सप्तमी के दिन इन बातों का रखें खास ध्यान

10 मार्च को Sheetala Saptami के दिन कुछ नियमों का पालन करना शुभ माना जाता है। खासकर जिन घरों में नवजात या छोटे बच्चे होते हैं, उनकी माताएं इन बातों का ध्यान रखती हैं।

  • इस दिन चूल्हा नहीं जलाया जाता
  • घर में झाड़ू-पोछा नहीं किया जाता
  • माताएं अपने बाल नहीं धोतीं
  • कपड़े नहीं धोए जाते
  • माता की पूजा के बाद ही ठंडा भोजन किया जाता है।
  • सुई, कैंची या तेज धार वाली चीजों से दूर रहने की भी परंपरा है।

माता शीतला की पूजा कैसे करें

सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और घर के मंदिर या शीतला माता के मंदिर में जाकर पूजा करें।

  • माता को दही-चावल का भोग लगाएं।
  • ठंडे जल से माता का अभिषेक करें।
  • परिवार और बच्चों की सेहत के लिए प्रार्थना करें।

मान्यता है कि ठंडे जल से अभिषेक करने से माता शीतला प्रसन्न होती हैं और बच्चों को रोगों से बचाती हैं

किन बीमारियों से बचाव की मान्यता

धार्मिक मान्यता के अनुसार शीतला माता की पूजा करने से बच्चों को कई तरह की बीमारियों से रक्षा मिलती है, जैसे:

  • चेचक और त्वचा से जुड़ी बीमारियां
  • बुखार और संक्रमण
  • फोड़े-फुंसी
  • खसरा जैसी बाल्यकाल की बीमारियां

इसी वजह से पुराने समय से माताएं शीतला सप्तमी का व्रत रखकर अपने बच्चों की लंबी उम्र और अच्छी सेहत की कामना करती हैं।

धार्मिक मान्यता और संदेश

शीतला सप्तमी केवल एक व्रत नहीं बल्कि स्वास्थ्य और स्वच्छता का संदेश भी देता है। परंपरा के अनुसार इस दिन ठंडे भोजन का सेवन और विश्राम का महत्व बताया गया है। माता शीतला की पूजा से घर में सुख-शांति और बच्चों के जीवन में स्वास्थ्य व सुरक्षा बनी रहती है।

निष्कर्ष

Sheetala Saptami 2026 केवल एक व्रत नहीं, बल्कि स्वास्थ्य सुरक्षा और पारिवारिक सुख-समृद्धि का प्रतीक पर्व है। शीतला माता की उपासना से जहां रोगों से मुक्ति मिलती है, वहीं जीवन में शांति, संतुलन और खुशहाली आती है। इसी कारण शीतला सप्तमी को रोग निवारण और सुख-समृद्धि का दिव्य वरदान कहा जाता है। मान्यता है कि शीतला सप्तमी के दिन एक दिन पहले बनाया गया भोजन ग्रहण करने के बावजूद कोई भी बीमार नहीं पड़ता, क्योंकि यह सब शीतला माता के आशीर्वाद से संभव माना जाता है।

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