Dasha Mata Vrat पूजा मुहूर्त (13 मार्च 2026)
- शुरू: सुबह 6:27 बजे (सूर्योदय)
- समाप्त: लगभग 8:45 बजे तक
👉 इसलिए सुबह 6:27 AM से 8:45 AM के बीच दशा माता की पूजा करना सबसे शुभ माना जाता है।
इस समय महिलाएं दशा माता की पूजा, दशा डोरा बांधना, कथा सुनना और आरती करती हैं और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करती हैं।
Dasha Mata Vrat की पूजा विधि
- सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें।
- घर के मंदिर या किसी पेड़ (विशेषकर पीपल) के पास पूजा स्थान बनाएं।
- माता दशा की तस्वीर या प्रतीक स्थापित करें।
- दशा का धागा (दशा डोरा) लेकर पूजा करें।
- माता को रोली, चावल, फूल और दीपक अर्पित करें।
- 10 कथाएँ सुनें या पढ़ें।
- अंत में आरती करके परिवार की सुख-समृद्धि की प्रार्थना करें।
नोट: इस दिन घर में मंदिर के नीचे गुलाबी रंग से Dasha Mata बनाई जाती है और उन्हें भोग लगाया जाता है। व्रत को उसी दिन खोला जाता है।मान्यता है कि इस व्रत से घर की खराब दशा दूर होती है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।
Dasha Mata Vrat की पूजा सामग्री लिस्ट
- कलश
- रोली और चावल
- फूल और माला
- दीपक और घी
- नारियल
- सुपारी
- धूप / अगरबत्ती
- पिला कच्चा धागा (10 गांठ के साथ हल्दी में रंगे हुए दशा डोरा)
- फल और मिठाई
- हल्दी, कुमकुम
- पूजा की थाली
Dasha Mata Vrat का महत्व
- ग्रहों की खराब दशा को शांत करने के लिए यह व्रत किया जाता है।
- घर-परिवार में सुख-समृद्धि और शांति आती है।
- वैवाहिक जीवन और परिवार की सुरक्षा के लिए भी यह व्रत महत्वपूर्ण माना जाता है।
Dasha Mata Vrat के दौरान क्या खाएं
दशा माता व्रत के दिन महिलाएं आमतौर पर एक समय भोजन करती हैं। इस व्रत में भोजन अलौना (बिना नमक) बनाया जाता है। पूजा के बाद प्रसाद के रूप में लापसी, गेहूं की रोटी, हलवा या अन्य साधारण व्यंजन बनाए जाते हैं और वही ग्रहण किए जाते हैं। कई स्थानों पर महिलाएं पहले माता को भोग लगाकर ही भोजन करती हैं।
पीपल पूजन का महत्व
दशा माता व्रत में पीपल के पेड़ की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार पीपल के पेड़ में भगवान विष्णु का वास होता है। इस दिन महिलाएं पीपल के पेड़ की पूजा करके 10 बार परिक्रमा करती हैं और पेड़ पर कच्चा सूत या दशा डोरा लपेटती हैं। ऐसा करने से घर की नकारात्मक दशा दूर होती है और परिवार में सुख-समृद्धि आती है।
Dasha Mata Vrat कथा का संक्षिप्त सार
दशा माता व्रत की कथा में राजा नल और रानी दमयंती की कहानी का उल्लेख मिलता है। कथा के अनुसार राजा नल की ग्रह-दशा खराब होने से उन्हें कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। बाद में रानी दमयंती ने श्रद्धा और नियम से दशा माता का व्रत किया, जिससे उनकी बुरी दशा समाप्त हो गई और जीवन में सुख-समृद्धि वापस आ गई। इस कथा का मुख्य संदेश यह है कि श्रद्धा और नियम से किया गया व्रत जीवन की कठिनाइयों को दूर कर सकता है।
व्रत के नियम (Do’s and Don’ts)
दशा माता व्रत के दिन कुछ खास नियमों का पालन करना शुभ माना जाता है, जैसे:
- इस दिन घर के लिए नई झाड़ू नहीं खरीदनी चाहिए।
- घर से कोई भी पुरानी वस्तु बाहर नहीं फेंकनी चाहिए।
- किसी को उधार देने या लेने से बचना चाहिए।
- पूजा के बाद ही भोजन करना चाहिए और व्रत के नियमों का पालन करना चाहिए।
क्षेत्रीय परंपराएं
दशा माता व्रत विशेष रूप से राजस्थान में बहुत लोकप्रिय है। हालांकि अलग-अलग क्षेत्रों में इसे मनाने के तरीके में थोड़ा बहुत अंतर देखने को मिलता है। कहीं महिलाएं पीपल के पेड़ के पास सामूहिक रूप से पूजा करती हैं, तो कहीं घर पर ही माता की पूजा की जाती है। लेकिन सभी जगह इसका उद्देश्य एक ही होता है—परिवार की सुख-समृद्धि और ग्रह-दशा को शुभ बनाना।
डोरा धारण करना
पूजा के बाद दशा माता का डोरा (10 गांठों वाला) साल भर गले में पहना जाता है। यदि साल भर नहीं पहन सकते, तो वैशाख महीने के शुक्ल पक्ष तक इसे जरूर पहनना चाहिए।
अगर आप साल 2026 के सभी प्रमुख व्रत और त्योहारों की पूरी सूची जानना चाहते हैं, तो यहां पढ़ें – “2026 के सभी व्रत और त्योहार की पूरी लिस्ट”।
Dasha Mata Vrat 2026 – Top 5 SEO FAQ
1. दशा माता व्रत 2026 कब है?
दशा माता व्रत वर्ष 2026 में 13 मार्च (शुक्रवार) को मनाया जाएगा। यह व्रत फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की दशमी तिथि को रखा जाता है।
2. दशा माता व्रत का शुभ मुहूर्त क्या है?
13 मार्च 2026 को दशा माता की पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 6:27 बजे (सूर्योदय) से लगभग 8:45 बजे तक रहेगा। इस समय पूजा करना शुभ माना जाता है।
3. दशा माता व्रत क्यों किया जाता है?
दशा माता व्रत घर-परिवार की सुख-समृद्धि, शांति और ग्रहों की खराब दशा को दूर करने के लिए किया जाता है। इस व्रत से जीवन में सकारात्मकता और खुशहाली आने की मान्यता है।
4. दशा माता व्रत में क्या खाया जाता है?
इस व्रत में आमतौर पर एक समय अलौना (बिना नमक) भोजन किया जाता है। प्रसाद के रूप में लापसी, गेहूं की रोटी, हलवा आदि बनाए जाते हैं।
5. दशा माता व्रत में पीपल के पेड़ की पूजा क्यों की जाती है?
दशा माता व्रत में पीपल के पेड़ को भगवान विष्णु का स्वरूप मानकर पूजा की जाती है। महिलाएं पीपल के पेड़ की 10 बार परिक्रमा करके कच्चा सूत (दशा डोरा) बांधती हैं और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करती हैं।





