व्हाइट हाउस में ट्रंप और कार्नी की ऐतिहासिक मुलाकात

ट्रम्प‑कार्नी की ऐतिहासिक मुलाकात: व्यापार, संप्रभुता और 50वें राज्य की बहस का नया अध्याय

व्हाइट हाउस में ट्रंप और कार्नी की ऐतिहासिक मुलाकात

वाशिंगटन डी.सी. — अमेरिकी पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प (Donald Trump) और कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी (Mark Carney) के बीच हालिया मुलाकात ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति और व्यापार नीति में नई हलचल पैदा कर दी है। इस बैठक में वक्तव्य, विरोधाभासी दृष्टिकोण, और संभावनाओं का मिश्रण देखने को मिला है — जहाँ एक ओर प्रशंसा और संधि की चर्चा थी, वहीं दूसरी ओर तनाव और सीमा मामलों की अनसुलझी समस्याएँ बनी रहीं।

बैठक का पृष्ठभूमि

– ट्रम्प-कार्नी की यह मुलाकात उस समय हुई है जब दोनों देशों के बीच व्यापारिक तनाव (Tariff Dispute) एक गंभीर मुद्दा बन चुका है।
– ट्रम्प ने इस बैठक में USMCA (संयुक्त राज्य‑मेक्सिको-कनाडा समझौता) की पुनर्समीक्षा या पुनर्संरचना की संभावना को खींचा।
– इसके अलावा, ट्रम्प ने सार्वजनिक रूप से यह सुझाव दोहराया कि यदि संभव हो तो कनाडा को “50वें राज्य” (51st state) के रूप में शामिल करना बेहतर हो सके — इस टिप्पणी को लेने पर कार्नी ने सख्त विरोध किया।

बैठक के मुख्य बिंदु

1. व्यापार वार्ता और टैरिफ मसले

ट्रम्प और कार्नी दोनों ही मुलाकात के दौरान व्यापार एवं टैरिफ मुद्दों पर बातचीत करना चाहते थे। ट्रम्प ने कहा कि USMCA को “उलटने” या संशोधित करने की संभावना स्वीकार्य है, खासकर उन पहلوओं को लेकर जिनमें अमेरिका का मानना है कि वह लाभहीन है।

लेकिन इस बैठक में कोई “ठोस सौदा” नहीं हो पाया। कार्नी को प्रशंसा तो मिली, लेकिन व्यापारिक राहत या टैरिफों को हटाने पर कोई अनुकूल निर्णय घोषित नहीं हुआ।

2. सम्मान और राजनयिक भाषा

मुलाकात के दौरान ट्रम्प ने कार्नी की प्रशंसा की, उन्हें “विश्व स्तरीय नेता” कहा। वहीं, कार्नी ने ट्रम्प को “परिवर्तनकारी राष्ट्रपति” करार दिया और यह उल्लेख किया कि उनके और कनाडा जनता के बीच सम्मेलन की अवधि में उनकी नीतियाँ तुलनीय हैं।

राजनयिकता की इस भाषा के बावजूद, गहरी असहमति और सावधानी भी स्पष्ट थी — खासकर उन विषयों पर जो दोनों देशों की राष्ट्रीय संप्रभुता से जुड़े हैं।

3. 50वें राज्य (51st State) की विवादित टिप्पणी

ट्रम्प ने कभी-कभी यह प्रस्ताव दोहराया कि कनाडा को अमेरिका का 50वाँ राज्य बनाया जाना चाहिए — एक ऐतिहासिक और संवेदनशील कथन। इस पर कार्नी ने तुरंत और स्पष्ट रूप से विरोध जताया, और कहा कि “कनाडा कभी बिक्री योग्य नहीं है”।

ट्रम्प ने “never say never” (कभी न कहो) कहकर आंशिक रूप से इस प्रस्ताव की संभावनाओं को उजागर किया, लेकिन उसने स्वीकार किया कि ऐसा निर्णय “दोनों देशों की सहमति” पर निर्भर होगा।

4. अंतरराष्ट्रीय एवं क्षेत्रीय मुद्दे

बैठक में अन्य महत्वपूर्ण मुद्दे भी चर्चा में आए — जैसे भारत‑पाक तनाव, मध्य-प्राच्य शांति प्रक्रियाएँ, और सुरक्षा गारंटी। कार्नी ने खासतौर पर भारत‑पाक संघर्ष के संदर्भ में ट्रम्प की भूमिका की प्रशंसा की और कहा कि उन्होंने “शांति की पहल” में योगदान किया।

इसके अतिरिक्त, दोनों नेताओं ने यह संकेत दिया कि वे अमेरिका और कनाडा के बीच न केवल आर्थिक बल्कि सुरक्षा और रणनीतिक सहयोग को पुनः परिभाषित करने की दिशा में आगे बढ़ना चाहते हैं।

5. यूक्रेन संकट: जल्द समाधान की साझी इच्छा

बैठक के दौरान ट्रम्प और कार्नी ने यूक्रेन में चल रहे युद्ध को लेकर चिंता जताई और इसके समाधान की तात्कालिकता पर सहमति जताई।
ट्रम्प ने कहा, “कार्नी चाहते हैं कि यह युद्ध जितनी जल्दी हो सके समाप्त हो,” और उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि दोनों में “कई समानताएँ हैं,” भले ही कुछ “कठिन बिंदुओं” पर मतभेद बना हुआ है।

6. चीन पर सख्ती और व्यापार वार्ता

ग्लोबल ट्रेड के संदर्भ में ट्रम्प ने यह दावा किया कि चीन की अर्थव्यवस्था अमेरिकी टैरिफ़ के कारण काफ़ी ‘पीड़ित’ है।
उन्होंने इशारा किया कि बीजिंग एक नए व्यापार समझौते पर बातचीत करने के लिए तैयार है, लेकिन उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि बैठक कब होगी — सिर्फ़ इतना कहा, “हम उनके साथ सही समय पर बैठक करेंगे।”

7. मध्य पूर्व में बड़ी घोषणा की तैयारी

ट्रम्प ने इस बैठक के दौरान यह भी बताया कि वह जल्द ही मध्य पूर्व की यात्रा पर जाने वाले हैं और एक “बहुत, बहुत बड़ी घोषणा” करने वाले हैं।
उन्होंने कहा कि यह “कई वर्षों में किसी निश्चित विषय पर की गई सबसे महत्वपूर्ण घोषणाओं में से एक होगी।”
उन्होंने संभावित तारीखें भी बताईं — “या तो गुरुवार, शुक्रवार या सोमवार।” हालांकि उन्होंने विषय स्पष्ट नहीं किया, यह संकेत ज़रूर मिला कि यह घोषणा क्षेत्रीय स्थिरता या शांति समझौते से जुड़ी हो सकती है।

प्रतिक्रिया और चुनौतियाँ

  • कनाडाई सार्वजनिक दबाव
    व्यापार तनाव और टैरिफों के विरुद्ध कनाडाई उद्योग और श्रमिकों की नाराजगी बढ़ रही है। उन्हें परिणाम चाहिए — सिर्फ दावे नहीं। इस बैठक ने आशाएँ जगाई हैं, लेकिन ठोस नतीजों की कमी से निराशा भी बढ़ सकती है।
  • टीम गठबंधन और राजनीतिक जोखिम
    कार्नी के देश में राजनीतिक दबाव बढ़ सकता है अगर वे इस बैठक के बाद कोई स्पष्ट विजय नहीं ला पाएँ। विपक्षी दल और मीडिया इस बैठक के नतीजों पर कटाक्ष कर सकते हैं।
  • ब्याज की अनिश्चितता
    अमेरिकी-निगलनी नीतियों की अनिश्चितता (शामी-आधारित प्रकल्प, राजनीतिक बदलाव आदि) इस तरह की द्विपक्षीय वार्ताओं को अस्थिर बना देती है।
  • समझौते की बाधाएँ
    टैरिफ हटाना, USMCA संशोधन, और “50वें राज्य” जैसे संवेदनशील मुद्दे ऐसे हैं जिनमें द्विपक्षीय और आंतरिक संवैधानिक बाधाएँ हैं।

निष्कर्ष और आगे की दिशा

इस बैठक ने स्पष्ट किया कि ट्रम्प और कार्नी दोनों चाहेंगे कि उनके देशों के बीच संबंध सुधरें, संवाद खुला हो, और सहयोग का ढाँचा नया आकार ले। लेकिन इस राह में चुनौतियाँ कम नहीं हैं।
व्यापार समझौता अभी दूर है, लेकिन राजनीतिक और आदर्श स्तर पर कदम ज़रूर बढ़े हैं।
संप्रभुता का मुद्दा (कनाडा “बेची नहीं जाए”) भावनात्मक और राजनीतिक संवेदनाओं को छूता है, और इस पर समझौता आसान नहीं है।