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Sensex-Nifty Crash: एक दिन में ₹37 लाख करोड़ डूबे, 22 महीने की सबसे बड़ी गिरावट

Sensex-Nifty Crash: एक दिन में ₹37 लाख करोड़ डूबे, 22 महीने की सबसे बड़ी गिरावट

Sensex-Nifty Crash: देश के शेयर बाजार में इन दिनों भारी उथल-पुथल देखने को मिल रही है। पिछले कुछ हफ्तों में आई तेज गिरावट ने निवेशकों को झटका दे दिया है। 27 फरवरी से 19 मार्च के बीच बाजार में ऐसी गिरावट आई है जो पिछले 22 महीनों में सबसे बड़ी मानी जा रही है। युद्ध जैसे हालात, कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और वैश्विक बाजारों की कमजोरी ने मिलकर बाजार की हालत खराब कर दी है।

27 फरवरी से 19 मार्च तक बाजार में बड़ी गिरावट

इस दौरान शेयर बाजार में गिरावट धीरे-धीरे नहीं बल्कि लगातार दबाव के साथ देखने को मिली। 27 फरवरी से 19 मार्च के बीच Sensexकरीब 7,080 अंक टूटकर 81,287 से गिरकर 74,207 तक आ गया, जो हाल के महीनों की सबसे बड़ी गिरावट मानी जा रही है। वहीं Nifty में भी करीब 2,176 अंकों की कमजोरी दर्ज की गई, जिससे बाजार का कुल माहौल नकारात्मक हो गया। लगातार गिरते इंडेक्स की वजह से निवेशकों का भरोसा कमजोर पड़ने लगा और बाजार में घबराहट साफ दिखाई देने लगी।

छोटे निवेशकों ने नुकसान के डर से तेजी से बिकवाली की, जबकि बड़े निवेशक भी सतर्क हो गए। विशेषज्ञों का कहना है कि यह गिरावट सिर्फ भारत के अंदरूनी कारणों से नहीं आई, बल्कि वैश्विक स्तर पर बढ़ते तनाव, युद्ध जैसे हालात, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और विदेशी निवेशकों की बिकवाली ने मिलकर बाजार पर दबाव बनाया, जिसकी वजह से इतनी बड़ी गिरावट देखने को मिली।

₹37 लाख करोड़ का भारी नुकसान

इस गिरावट के दौरान शेयर बाजार की कुल मार्केट वैल्यू में जबरदस्त कमी दर्ज की गई। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि तेज बिकवाली के बीच सिर्फ एक ही दिन में निवेशकों के करीब ₹37 लाख करोड़ साफ हो गए, जो हाल के वर्षों का सबसे बड़ा नुकसान माना जा रहा है। बाजार में आई इस भारी गिरावट से बड़ी कंपनियों के शेयर तेजी से टूटे, जिससे कुल मार्केट कैप में बड़ी गिरावट दर्ज हुई।

इसका असर सिर्फ बड़े निवेशकों पर ही नहीं बल्कि छोटे रिटेल निवेशकों, म्यूचुअल फंड और विदेशी निवेशकों पर भी पड़ा। कई निवेशकों ने घबराहट में अपने शेयर बेच दिए, जिससे गिरावट और तेज हो गई। विशेषज्ञों के अनुसार जब बाजार में इस तरह की अचानक बिकवाली होती है तो वैल्यूएशन तेजी से नीचे आता है और कुछ ही घंटों में लाखों करोड़ रुपये की संपत्ति कम हो जाती है। यही वजह है कि इस गिरावट को हाल के समय का सबसे बड़ा मार्केट झटका माना जा रहा है।

कच्चा तेल बना सबसे बड़ा कारण

गिरावट की सबसे बड़ी वजहों में से एक कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें हैं।

  • युद्ध की वजह से सप्लाई पर असर
  • तेल महंगा होने से महंगाई बढ़ने का डर
  • कंपनियों के मुनाफे पर दबाव

इन कारणों से निवेशकों ने बाजार से पैसा निकालना शुरू कर दिया।

वैश्विक बाजारों में भी हाहाकार

सिर्फ भारत ही नहीं, दुनिया के कई बड़े बाजार भी गिरावट की चपेट में हैं।अमेरिका, यूरोप और एशिया के बाजारों में कमजोरी देखने को मिली। जब वैश्विक बाजार गिरते हैं तो उसका असर भारतीय बाजार पर भी पड़ता है।

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फेड और केंद्रीय बैंकों का सख्त रुख

दुनिया भर के केंद्रीय बैंक महंगाई को काबू में करने के लिए सख्त कदम उठा रहे हैं।

  • ब्याज दरें बढ़ाने के संकेत
  • निवेश महंगा होने का डर
  • विदेशी निवेश में कमी
  • RBI की सख्त नीति

इन कारणों से भी शेयर बाजार में दबाव बढ़ा।

20 दिनों में करीब 9% तक लुढ़का बाजार

कम समय में आई इस तेज गिरावट ने निवेशकों को पूरी तरह चौंका दिया है। आमतौर पर बाजार में इतनी बड़ी गिरावट आने में कई महीने लग जाते हैं, लेकिन इस बार हालात इतने खराब रहे कि सिर्फ लगभग 20 दिनों के अंदर बाजार करीब 9% तक नीचे आ गया। सेंसेक्स और निफ्टी में लगातार गिरावट के कारण निवेशकों का भरोसा कमजोर पड़ने लगा और हर दिन बिकवाली का दबाव बढ़ता गया।

खास बात यह रही कि गिरावट सिर्फ बड़े शेयरों तक सीमित नहीं रही, बल्कि मिडकैप और स्मॉलकैप कंपनियों में भी भारी टूट देखने को मिली, जिससे नुकसान और ज्यादा बढ़ गया। विशेषज्ञों का कहना है कि कम समय में इतनी बड़ी गिरावट तब होती है जब एक साथ कई नकारात्मक कारण सामने आते हैं, जैसे वैश्विक तनाव, विदेशी निवेश की निकासी, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता। यही वजह है कि इस गिरावट को हाल के समय की सबसे तेज और बड़ी गिरावटों में गिना जा रहा है।

Facts & Figures – 2026 की सबसे खराब शुरुआत में शामिल

  • इस साल बाजार की शुरुआत कमजोर रही
  • 1 जनवरी से 16 मार्च तक सेंसेक्स करीब 11.4% गिरा
  • पिछले 47 वर्षों में यह पांचवीं सबसे खराब शुरुआत मानी जा रही है
  • इससे पहले बड़ी गिरावट
    • 2008 – ग्लोबल फाइनेंशियल क्राइसिस
    • 2020 – कोरोना महामारी
    • अब 2026 भी कमजोर शुरुआत वाले सालों में शामिल

आगे क्या होगा?

विशेषज्ञों का मानना है कि शेयर बाजार में आई यह गिरावट अभी तुरंत पूरी तरह खत्म होती नहीं दिख रही है। जब तक वैश्विक स्तर पर चल रहा तनाव कम नहीं होता, कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता नहीं आती और दुनिया के बड़े बाजार संभलते नहीं, तब तक बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। युद्ध जैसे हालात की वजह से निवेशकों में डर बना हुआ है, वहीं तेल महंगा होने से महंगाई बढ़ने का खतरा है, जिसका सीधा असर कंपनियों के मुनाफे और अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। इसके अलावा अमेरिका समेत कई देशों के केंद्रीय बैंकों के सख्त रुख के कारण विदेशी निवेश भी कमजोर हो रहा है, जिससे भारतीय बाजार पर दबाव बना हुआ है।

विशेषज्ञ निवेशकों को सलाह दे रहे हैं कि ऐसे समय में घबराकर जल्दबाजी में फैसले न लें। बाजार में गिरावट के दौरान अक्सर लोग नुकसान से बचने के लिए शेयर बेच देते हैं, लेकिन लंबे समय के निवेशकों के लिए यही समय सही रणनीति बनाने का होता है। मजबूत कंपनियों में सोच-समझकर किया गया निवेश भविष्य में फायदा दे सकता है, इसलिए धैर्य रखना और बिना जानकारी के फैसले लेने से बचना जरूरी माना जा रहा है।

विशेषज्ञों के अनुसार अभी बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।

संभावित कारण

  • युद्ध कब खत्म होगा तय नहीं
  • तेल की कीमतें ऊंची
  • विदेशी निवेश कमजोर
  • ब्याज दरें बढ़ सकती है

सलाह

  • घबराकर शेयर न बेचें
  • लंबे समय के निवेश पर ध्यान दें
  • मजबूत कंपनियों में ही पैसा लगाएं

क्या 2020 जैसा बड़ा Crash फिर आ सकता है?

हाल ही में आई तेज गिरावट के बाद निवेशकों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या शेयर बाजार में फिर से 2020 जैसा बड़ा क्रैश आ सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार फिलहाल स्थिति 2020 जैसी नहीं है, लेकिन जोखिम पूरी तरह खत्म भी नहीं हुआ है। साल 2020 में कोरोना महामारी की वजह से पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था अचानक रुक गई थी, जिसके कारण शेयर बाजार में ऐतिहासिक गिरावट देखने को मिली थी। उस समय कुछ ही हफ्तों में सेंसेक्स हजारों अंक टूट गया था और निवेशकों को भारी नुकसान हुआ था।

वर्तमान स्थिति में गिरावट की वजह युद्ध का तनाव, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें, महंगाई का दबाव और केंद्रीय बैंकों की सख्त नीति है। ये कारण बाजार पर दबाव जरूर बना रहे हैं, लेकिन अर्थव्यवस्था पूरी तरह बंद होने जैसी स्थिति अभी नहीं है। इसलिए विशेषज्ञ मानते हैं कि 2020 जैसा बड़ा क्रैश होने की संभावना कम है, हालांकि जब तक वैश्विक हालात सामान्य नहीं होते, तब तक बाजार में तेज उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।

निवेश सलाहकारों का कहना है कि ऐसे समय में घबराने की बजाय सावधानी रखना जरूरी है। बाजार में गिरावट लंबे समय के निवेशकों के लिए अवसर भी बन सकती है, लेकिन बिना जानकारी के निवेश करना नुकसान दे सकता है। इसलिए निवेश करने से पहले कंपनियों की स्थिति, बाजार का माहौल और लंबी अवधि की योजना जरूर देखनी चाहिए।

निष्कर्ष

Sensex-Nifty Crash: 22 महीनों की सबसे बड़ी गिरावट ने यह साफ कर दिया है कि शेयर बाजार पूरी तरह वैश्विक हालात पर निर्भर है। युद्ध, तेल और महंगाई का असर सीधे निवेशकों की जेब पर पड़ रहा है। हालांकि विशेषज्ञ मानते हैं कि गिरावट के बाद ही नए मौके बनते हैं, इसलिए समझदारी से निवेश करना ही सबसे सही रणनीति है।

Stock Market Crash – Top 5 FAQ

1. Sensex-Nifty Crash क्यों गिरा?
युद्ध का तनाव, कच्चे तेल की कीमतें बढ़ना, विदेशी निवेश की बिकवाली और वैश्विक बाजारों की कमजोरी मुख्य कारण हैं।

2. क्या सच में ₹37 लाख करोड़ साफ हुए?
हाँ, तेज गिरावट के दौरान एक ही दिन में बाजार की मार्केट वैल्यू करीब ₹37 लाख करोड़ कम हो गई।

3. क्या यह 22 महीनों की सबसे बड़ी गिरावट है?
हाँ, हाल की गिरावट को पिछले 22 महीनों की सबसे बड़ी गिरावट माना जा रहा है।

4. क्या बाजार अभी और गिर सकता है?
विशेषज्ञों के अनुसार वैश्विक हालात ठीक होने तक बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।

5. निवेशकों को क्या करना चाहिए?
घबराकर शेयर न बेचें, सोच-समझकर और लंबी अवधि के हिसाब से निवेश करें।

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